पाठ १०० वा - दुसर्या गणाचे आत्मनेपदी धातू
सू (२ आ. प.) जन्म देणे
आत्मनेपदी वर्तमानकाळ
सुवे सूवहे सूय़्महे
सूषे सुवाथे सूध्वे
सूते सुवाते सुवते
आत्मनेपदी प्रथम भूतकाळ
असुवि असूवहि असूमहि
असूथा: असुवाथाम् असूध्वम्
असूत असुवाताम् असुवत
आत्मनेपदी आज्ञार्थ
सुवै सुवावहै सुवामहै
सूष्व सुवाथाम् सूध्वम्
सूताम् सुवाताम् सुवताम्
आत्मनेपदी विध्यर्थ
सुवीय सुवीवहि सुवीमहि
सुवीथा: सुवीयाठाम् सुवीध्वम्
सुवीत सुवीयाताम् सुवीरन्
अधि + इ (२ आ. प.) शिकणे
(अधि उपसर्ग लागला की ‘इ’ हा परस्मैपदी धातू आत्मनेपदी होतो.
आत्मनेपदी वर्तमानकाळ
अधीये अधीवहे अधीमहे
अधीषे अधीयाथे अधीध्वे
अधीते अधीयाते अधीयते
आत्मनेपदी प्रथम भूतकाळ
अध्यैयि अध्यैवहि अध्यैमहि
अध्यैथा: अध्यैयाथाम् अध्यध्वम्
अध्यैत अध्यैयाताम् अध्यैयत
आत्मनेपदी आज्ञार्थ
अध्ययै अध्ययावहै अध्ययामहै
अधीष्व अधीयाथाम् अधीध्वम्
अधीताम् अधीयाताम् अधीयताम्
आत्मनेपदी विध्यर्थ
अधीयीय अधीयीवहि अधीयीमहि
अधीयीथा: अधियीयाथाम् अधीयीध्वम्
अधीयीत अधीयीयाताम् अधीयीरन्
ईश् (२ आ. प.) अधिकार चालवणे
आत्मनेपदी वर्तमानकाळ
ईशे ईश्वहे ईश्महे
ईशिषे ईशाथे ईशिध्वे
ईष्टे ईशाते ईशते
आत्मनेपदी प्रथम भूतकाळ
ऐशि ऐश्वहि ऐश्महि
ऐष्ठा: ऐशाथाम् ऐड्ढ्वम्
ऐष्ट ऐशाताम् ऐशत
आत्मनेपदी आज्ञार्थ
ईशै ईशावहै ईशामहै
ईशिष्व ईशाताम् ईशिध्वम्
ईष्टाम् ईशाताम् ईशताम्
आत्मनेपदी विध्यर्थ
ईशीय ईशीवहि ईशीमहि
ईशीथा: ईशीयाथाम् ईशीध्वम्
ईशीत ईशीयाताम् ईशीरन्
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