Thursday, January 28, 2021

पाठ ९८ वा - धातूंचा दुसरा गट

पाठ ९८ वा -  धातूंचा दुसरा गट


दुसर्‍या गणाचे धातू (परस्मैपदी)

 

, , , १० या धातूंचा एक गट आहे उरलेल्या गणातील धातूंचा एक गट आहे. एक, चार, सहा दहा या धातूंची विकरणे अकारान्त आहेत. त्यामुळे सर्वसाधारणपणे हे सर्व धातू सारखेच चालतात. उरलेल्या दुसर्‍या गटातील धातूंची विकरणे ही अकारान्त नाहीत. त्यामुळे त्यातील प्रत्येक धातूची रूपे वेगवेगळी होतात. आज पासून आपण त्या धातूंचा परिचय करून घेणार आहोत. 



या धातूंना लागणार्‍या प्रत्ययांमधे सुद्धा थोडा फरक आहे. 


परस्मैपदी वर्तमानकाळ भूतकाळ यामधे प्रत्ययांमधे फरक नाही. परस्मैपदी आज्ञार्थात द्वितीय पुरुष एकवचनाचाहिअसा प्रत्यय आहे विध्यर्थाचे प्रत्यय पूर्णपणे वेगळे आहेत.


परस्मैपदी वर्तमानकाळाचे प्रत्यय


मि   :   :

सि   :  

ति   :   अन्ति


परस्मैपदी भूतकाळाचे प्रत्यय

 

अम्       

स् (:)   तम्  

त्      ताम्   अन्

  

परस्मैपदी आज्ञार्थी प्रत्यय

 

आनि   आव   आम

हि       तम्    

तु      ताम्    अन्तु


परस्मैपदी विध्यर्थ 


याम्    याव    याम्

या:    यातम्   यात 

यात्   याताम्   यु:


असे परस्मैपदी विध्यर्थाचे प्रत्यय आहेत.


खाली दुसर्‍या गणातील काही धातू चालवून दाखवले आहेत. 


दुसर्‍या गणाचे धातू

दुसर्‍या गणाला विकरण नाही. मूळ धातूलाच प्रत्यय लागून रूपे तयार होतात.


या ( .) जाणे

परस्मैपदी वर्तमानकाळ


यामि    याव:   याम:

यासि    याथ:   याथ

याति   यात:    यान्ति


परस्मैपदी प्रथम भूतकाळ


अयाम्   अयाव    अयाम

अया:   अयातम् अयात

अयात्  अयाताम् अयान्/अयु:


परस्मैपदी आज्ञार्थ


यानि   याव   याम

याहि यातम्   यात

यातु याताम्  यान्तु


परस्मैपदी विध्यर्थ 


यायाम् यायाव यायाम्

याया: यायातम् यायात

यायात् यायाताम् यायु:


अस् (२प) = असणे

परस्मैपदी वर्तमानकाळ


अस्मि  स्व: स्म:

असि स्थ: स्थ

अस्ति  स्त: सन्ति


परस्मैपदी प्रथम भूतकाळ


आसम् आस्व आस्म

आसी: आस्तम् आस्त

आसीत् आस्ताम् आसन्


परस्मैपदी आज्ञार्थ


असानि  असाव  असाम

एधि   स्तम् स्त

अस्तु स्ताम्    सन्तु


*परस्मैपदी विध्यर्थ *


स्याम् स्याव  स्याम

स्या: स्यातम्  स्यात

स्यात् स्याताम्  स्यु:


हन् (२प.) ठार मारणे

परस्मैपदी वर्तमानकाळ

हन्मि हन्व: हन्म:

हंसि हथ: हथ

हन्ति हत: घ्नन्ति


परस्मैपदी प्रथमभूतकाळ

अहनम् अहन्व अहन्म

अहन् अहतम् अहत

अहन् अहताम् अघ्नन् 


परस्मैपदी आज्ञार्थ

हनानि हनाव हनाम

जहि हतम् हत 

हन्तु हताम् घ्नन्तु


परस्मैपदी विध्यर्थ 

हन्याम् हन्याव हन्याम

हन्या: हन्यातम् हन्यात

हन्यात् हन्याताम् हन्यु:


रुद् (२प) = रडणे

परस्मैपदी वर्तमानकाळ


रोदिमि रुदिव: रुदिम:

रोदिषि रुदिथ: रुदिथ

रोदिति रुदित: रुदन्ति


परस्मैपदी प्रथम भूतकाळ


अरोदम् अरुदिव अरुदिम

अरोदी: / अरोद: अरुदितम् अरुदित

अरोदित् / अरोदत् अरुदिताम् अरुदन्


परस्मैपदी आज्ञार्थ


रोदानि रोदाव रोदाम

रुदिहि रुदितम् रुदित

रोदितु रुदिताम् रुदन्तु


परस्मैपदी विध्यर्थ 


रुद्याम् रुद्याव रुद्याम

रुद्या: रुद्यातम् रुद्यात

रुद्यात् रुद्याताम् रुद्यु:


विद् (२प.) = जाणणे

परस्मैपदी वर्तमानकाळ


वेद्मि विद्व: विद्म:

वेत्सि वित्थ: वित्थ

वेत्ति वित्त: विदन्ति

किंवा

वेद विद्व विद्म

वेत्थ विदथु: विद

वेद विदतु: विदु:


परस्मैपदी प्रथमभूतकाळ

अवेदम् अविद्व अविद्म

अवे:/अवेत्/अवेद् अवित्तम् अवित्त

अवेत्/अवेद् अवित्ताम् अविदु:


परस्मैपदी आज्ञार्थ

वेदानि वेदाव वेदाम

विद्धि वित्तम् वित्त

वेत्तु वित्ताम् विदन्तु


परस्मैपदी विध्यर्थ 

विद्याम् विद्याव विद्याम

विद्या: विद्यातम् विद्यात

विद्यात् विद्याताम् विद्यु:


शी ( . .) = झोपणे

आत्मनेपदी वर्तमानकाळ

शये शेवहे शेमहे

शेषे शयाथे शेध्वे

शेते शयाते शेरते


परस्मैपदी प्रथमभूतकाळ

अशयि अशेवहि अशेमहि

अशेथा: अशयाथाम् अशेध्वम्

अशेत अशयाताम् अशेरत


परस्मैपदी आज्ञार्थ

शयै शयावै शयामहै

शेष्व शयाथाम् शेध्वम्

शेताम् शयाताम् शेरताम्


परस्मैपदी विध्यर्थ 

शयीय    शयीवहि शयीमहि

शयीथा:   शयीयाथाम् शयीध्वम्

शयीत    शयीयाताम् शयीरन्



No comments:

Post a Comment

पाठ १२१ वा - स्वयं अध्ययनासाठी सुभाषिते

पाठ   १२१   वा  -  स्वयं अध्ययनासाठी सुभाषिते १ ) अश्वं नैव गजं नैव व्याघ्रं नैव च नैव च ।   अजापुत्रं बलिं दद्यात् देवो दुर्...