Sunday, April 11, 2021

परस्मैपदी आज्ञार्थ

परस्मैपदी आज्ञार्थ 


आज्ञार्थाचा उपयोग जसा आज्ञा करण्यासाठी केला जातो, त्याप्रमाणे विनंती, इच्छा व्यक्त करणे, अनुमती मागणे अशा अनेक अर्थाच्या छटा व्यक्त करण्यासाठी केला जातो


संस्कृतमधे सर्वच काळ अर्थांमधे धातूंना लागणारे परस्मैपदी आत्मनेपदी असे दोन प्रकारचे प्रत्यय असतात.


परस्मैपदी आज्ञार्थ



आनि   आव   आम  प्रथम पुरुष

-      तम्      द्वितीय पुरुष

तु     ताम्   अन्तु   तृतीय पुरुष.


धातूचे अंग बनवण्याची रीत नेहेमीसारखीच असते. आपण नम् = नमस्कार करणे या धातूची आज्ञार्थी रूपे पाहूया.

नम् + = नम (धातूचे अंग)


नमानि   नमाव   नमाम   प्रथम पुरुष

नम     नमतम्   नमत   द्वितीय पुरुष

नमतु    नमताम्   नमन्तु  तृतीय पुरुष


अहं नमानि आवां नमाव वयं नमाम

त्वं नम   युवां नमतम् यूयं नमत

सा नमतु ते नमताम् ता: नमन्तु


नृत् ( . .)

नृत् + (विकरण) = नृत्य हे धातूचे अंग तयार झाले. आता त्याला प्रत्यय लागून रूपे तयार होतील.


नृत्यानि  नृत्याव  नृत्याम

नृत्य  नृत्यतम्   नृत्यत

नृत्यतु  नृत्यताम्  नृत्यन्तु 


लिख् ( . .) = लिहिणे


लिखानि  लिखाव  लिखाम

लिख   लिखतम्   लिखत 

लिखतु  लिखताम्  लिखन्तु


गण् (१० . .) = मोजणे, पर्वा करणे.


गणयानि गणयाव  गणयाम 

गणय   गणयतम्  गणयत

गणयतु  गणयताम्  गणयन्तु


स्वाध्याय

प्रश्न ) - खालील धातूंचा आज्ञार्थ लिहा


. . - सम् + वद्, खाद्, प्र + चल्, अभि + धाव्

. . - नृत्, स्निह्, तुष्, क्षम्-क्षाम्

. . - इष्-इच्छ्, कृत्-कृन्त्, मुच्-मुञ्च्, सृज्

१० . . - घुष्-घोष्, चिन्त्, वि + गण्, प्रति + पाल्


प्रश्न - खालील वाक्यांचे आज्ञार्थी क्रियापदे वापरून संस्कृतमधे भाषांतर करा.*


) आकाशात मेघ येवोत.

) लोक मेघ पाहोत.

) वडील बक्षिस देवोत.

) आई मुलाचे काव्य पाहो.

) काव्याने आई संतुष्ट होवो

) राजा गरीबाला धन देवो.

) बालक चंद्र पाहो.

) झाडावर फुले फुलोत.

) हनुमान् लंकेला जावो आणि सीतेला शोधो.

१०) दासाचे गुण धनिक जाणो.

११) सर्वांना सुख लाभो.

१२) वनामधे आम्रवृक्ष फळोत.

१३) वडील मुलाला सांभाळोत.

१४) महेश देवांची पूजा करो.

१५) वसुधा अलंकारांनी शरीर भूषवो.

१६) सर्व विद्यार्थी निबंध लिहोत.

१७) कुंभकार प्रवेश करो.

१८) सर्व संकटे नाहीशी होवोत.

१९) सर्व शत्रु नाहीसे होवोत.

२०) लोक मंगलकारक गोष्टी पाहोत.

२१) ईश्वराने प्रसन्न व्हावे.

२२) अर्चना पाणी शिंपडावे.

२३) ऋषी उपदेश करोत.

२४) स्वर्गप्राप्तीसाठी यज्ञ करावा.

२५) भक्त ईश्वराला भजोत



उत्तरे


) आकाशात मेघ येवोत.

आकाशे मेघा: आगच्छन्तु


) लोक मेघ पाहोत.

जना: मेघान् पश्यन्तु


) वडील बक्षिस देवोत.

जनक: उपहारं यच्छतु


) आई मुलाचे काव्य पाहो.

माता पुत्रस्य काव्यं पश्यतु


) काव्याने आई संतुष्ट होवो.

काव्येन माता सन्तुष्यतु


) राजा गरीबाला धन देवो.

नृप: दीनाय धन: यच्छतु


) बालक चंद्र पाहो.

बालक: चन्द्रं पश्यतु


) झाडावर फुले फुलोत.

वृक्षे पुष्पाणि विकसन्तु


*) हनुमान् लंकेला जावो आणि 

सीतेला शोधो.*

मारुति: लङ्कां गच्छतु सीतां अन्विष्यतु


१०) दासाचे गुण धनिक जाणो.

धनिक: दासस्य गुणान् बोधतु


११) सर्वांना सुख लाभो.

सर्वे सुखं विन्दन्तु


१२) वनामधे आम्रवृक्ष फळोत.

वने आम्रवृक्षा: फलन्तु


१३) वडील मुलाला सांभाळोत.

जनकळ् बालकं पालयतु


१४) महेश देवांची पूजा करो.

महेश: देवं पूजयतु


१५) वसुधा अलंकारांनी शरीर भूषवो.

वसुधा अलङ्कारै: शरीरं भूषयतु


१६) सर्व विद्यार्थी निबंध लिहोत.

सर्वे छात्रा: निबन्धं लिखन्तु


१७) कुंभकार प्रवेश करो.

कुम्भकार: प्रवीशतु


१८) सर्व संकटे नाहीशी होवोत.

सर्वाणि सङ्कटानि नश्यन्तु


१९) सर्व शत्रु नाहीसे होवोत.

सर्वे शत्रव: नश्यन्तु


२०) लोक मंगलकारक गोष्टी पाहोत.

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु


२१) ईश्वराने प्रसन्न व्हावे.

ईश्वर: प्रसीदतु


२२) अर्चना पाणी शिंपडावे.

अर्चना जलं सिञ्चतु


२३) ऋषी उपदेश करोत.

ऋषय: उपदिशन्तु


२४) स्वर्गप्राप्तीसाठी यज्ञ करावा.

स्वर्गप्राप्तये यजतु


२५) भक्त ईश्वराला भजोत. 

भक्त: ईश्वरं भजतु



परस्मैपदी आज्ञार्थात वाक्यांचा सरावासाठी प्रयोग बदलायचा होता. त्याची उत्तरे


) आकाशात मेघ येवोत.

आकाशे मेघा: आगच्छन्तु

आकाशे मेघै: आगम्यताम्


) लोक मेघ पाहोत.

जना: मेघान् पश्यन्तु

जनै: मेघा: दृश्यन्ताम्


) वडील बक्षिस देवोत.

जनक: उपहारं यच्छतु

जनकेन उपहार: दीयताम्


) आई मुलाचे काव्य पाहो.

माता पुत्रस्य काव्यं पश्यतु

मात्रा पुत्रस्य काव्यं दृश्यताम्


) काव्याने आई संतुष्ट होवो.

काव्येन माता सन्तुष्यतु

काव्येन मात्रा सन्तुष्यताम्


) राजा गरीबाला धन देवो.

नृप: दीनाय धनं यच्छतु

नृपेण दीनाय धनं दीयताम्


) बालक चंद्र पाहो.

बालक: चन्द्रं पश्यतु

बालकेन चन्द्र: दृश्यताम्


) झाडावर फुले फुलोत.

वृक्षे पुष्पाणि विकसन्तु

वृक्षे पुष्पै: विकस्यताम्


*) हनुमान् लंकेला जावो आणि 

सीतेला शोधो.*

मारुति: लङ्कां गच्छतु सीतां अन्विष्यतु

मारुतिना लङ्कां गम्यताम्


१०) दासाचे गुण धनिक जाणो.

धनिक: दासस्य गुणान् बोधतु

धनिकेन दासस्य गुणा: बुध्यताम्


११) सर्वांना सुख लाभो.

सर्वे सुखं विन्दन्तु

सर्वै: सुखं विद्यताम्


१२) वनामधे आम्रवृक्ष फळोत.

वने आम्रवृक्षा: फलन्तु

वने आम्रवृक्षै: फल्यताम्


१३) वडील मुलाला सांभाळोत.

जनक: बालकं पालयतु

जनकेन बालक: पाल्यताम्


१४) महेश देवांची पूजा करो.

महेश: देवं पूजयतु

महेशेन देव: पूज्यताम्


१५) वसुधा अलंकारांनी शरीर भूषवो.

वसुधा अलङ्कारै: शरीरं भूषयतु

वसुधया अलङ्कारै: शरीरं भूष्यताम्


१६) सर्व विद्यार्थी निबंध लिहोत.

सर्वे छात्रा: निबन्धं लिखन्तु

सर्वै: छात्रै: निबन्ध: लिख्यताम्


१७) कुंभकार प्रवेश करो.

कुम्भकार: प्रवीशतु

कुम्भकारेण प्रविश्यताम्


१८) सर्व संकटे नाहीशी होवोत.

सर्वाणि सङ्कटानि नश्यन्तु

सर्वै: सङ्कटै: नश्यताम्


१९) सर्व शत्रु नाहीसे होवोत.

सर्वे शत्रव: नश्यन्तु

सर्वै: शत्रुभि: नश्यताम्


२०) लोक मंगलकारक गोष्टी पाहोत.

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु

सर्वै: भद्राणि दृश्यन्ताम्


२१) ईश्वराने प्रसन्न व्हावे.

ईश्वर: प्रसीदतु

ईश्वरेण प्रसीद्यताम्


२२) अर्चना पाणी शिंपडावे.

अर्चना जलं सिञ्चतु

अर्चनया जलं सिच्यताम्


२३) ऋषी उपदेश करोत.

ऋषय: उपदिशन्तु

ऋषिभि: उपदिश्यताम्


२४) स्वर्गप्राप्तीसाठी यज्ञ करावा.

स्वर्गप्राप्तये यजतु

(तेन) स्वर्गप्राप्तये यज्यताम्


२५) भक्त ईश्वराला भजोत. 

भक्त: ईश्वरं भजतु

भक्तेन ईश्वर: भज्यताम्


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